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वन बंधु कल्याण योजना

अस भाग मे आदिवासिक कें कल्यार कें लेल प्रारंभ कैल गेलई वन बंधु कल्याण योजना कें जानकारी देल गेल छै.

योजना के बारे मे

वन बंधु कल्याण योजना कें उद्देश्य उचित संस्थागत तंत्र कें माध्यम स वांछित परिणाम प्राप्त कर कें लेल संसाधनक के बेसि उपयोग आ एकटा समग्र दृष्टिकोण कें जरिये भौतिक एवं वित्तीय उपलब्धियक पर ध्यान केंद्रित करई क आदिवासिक कें व्यापक विकास छै. देशभर मे जनजातीय आबादी कें जल कृषि व सिंचाई , बिजली, शिक्षा कौशल विकास , खेल एवं ओकर सांस्कृतिक विकास कें संरक्षण हाउसिंग , आजीविका, स्वास्थ्य ,स्वच्छता कें क्षेत्र मे महत्वपूर्ण सेवाक ,वं वस्तुअक मुहैया करावा कें लेल इ योजना एकटा संस्थागत तंत्र कें रूप मे काम करतइ.

भारत सरकार कें आदिवासी मामलक कें मंत्रलय ने आदिवासिक कें कल्याण कें लेल वनबंधु कल्याण योजना (वीकेवाई) शुरू कैल गेलई. इ योजना आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों कें एकटा विकासखंड मे पायलट आधार पर शुरू कैल गेलई. योजना कें तहत प्रत्येक ब्लॉक मे विभिन्न सुविधाक कें विकास कर कें लेल 10 करोड रुपया देव कें घोषणा भेलक्ष् या. इ ब्लॉकक कों चयन संबंधित राज्यक सिफारिशक आ कम साक्षरता दर कें आधार पर कैल गेलई. वन बंधु कल्वाण योजना मे केंद्रीय मंत्रलयक विभागक कें विकास कें विभिन्न योजनाक कें समसन्वय आ राज्य सरकार कें परिणाम आधारित योजनाक पर ध्यान केंद्रित कर कें परिकल्पना कैल गेलई या. प्रारंभ मे ब्लॉक कें कुल आबादी कें तुलना मे जनजातीय आबादी का कम स कम 33 प्रतिशत कें लक्षित करई क योजना कें मुर्तरूप देल गेलई या. वनबंधु कल्याण योजना कें मौटा तौर पर आशय एकटा रणनीतिक प्रक्रिया स छै जै इ सुनिश्चत कर कें परिकल्पना करई छै. कि केंद्रीय आ राज्य सरकारक कें विभिन्न कार्यक्रमक /स्कीमक कें तहत वस्तुअक आ सेवाअक कें लक्षितसब लाभ समुचित संस्थागत तंत्र कें माध्यम स संसाधनक कें तालमेल दूवारा वास्तव मे ओकरा तक पहुंचे.

इ योजना मुख्य रूप स अनुसूचित जनजाति आ अन्य सामाजिक समूहक कें बीच मानव विकास सूचकांक ढांचागत कर्मिक आ अंतर कें पूरा कर पर केंदित छै.

वीकेवाई मे केंद्रीय मंत्रलयक, विभागक कें विकास कें विभिन्न योजनाक पर ध्यान केंद्रित कर कें परिकल्पना कैल गेलई या. प्रारंभ मे ब्लॉक कें कुल आबादी कें तुलना मे जनजातीय आबादी कें कम स कम 33 प्रतिश्त कें लक्षित कैल जेतई.

  • जनजातीय मांिलय जनजातीय लोगक कें माल आ सेवाक कें वितरण कें लेल बनल मौजूदा संस्थानक कें मजबूत बनावा कें पहल पहल कें प्रारंभ कैल गेलक्ष् या. एकीकृत आदिवासी विकास संगठन /एकीकृत विकास परियोजना आ जत आवशयक हेतई नया संगठन कें सृजन कैल जैतइ.
  • इ उद्देश्य कें लेल राज्य सरकारक कें आवंटित विशष्ठि फंड कें विवेकपूर्ण उपयोग इ संस्थाक कें मजबूत बनावा कें लेल आ बेसि सशक्त संस्थागत तंत्र बनावा कें लेल कैल जाना चाहि.

लघु वनोपज

लघु वनोपज(एमएफपी) कतेको मांग आ आपूर्ति कें स्वत: प्रक्रिया कें तुलना मे व्यापारिक दूवारा निर्धारित कैल जाइ छै. योजना कें लागू कर मे इ सुनिश्चित कैल जाय छै कि वनवासिक कें ओकरा वजह स बकाया स वंचित नहि कैल जा रहल छै. इ योजना मे राज्यक मे एमएफपीकें बसि स बेसि बिक्री कीमत कें प्रारंभ स सें हो अपनाइल जा रहल छै. वेब पर आधारित राज्यक कें विभिन्न मंडियक मे लघु वनोपज कें वर्तमान कीमत कें जानकारी देव कें लेल एकटा वेब पोर्टल कें विकास कैल गेलक्ष् या.

शामिल उत्पाद

इ कार्यक्रम मे शामिल 12 लघु वनोपज छै

  • तेंदू पत्ता
  • बांस
  • महुआ बीज
  • साल पत्ता
  • साल बीज
  • लाख
  • चिंरोजी
  • जंगली शहद
  • आंवला
  • अदरक
  • गम(गोंद क्रि या)
  • करंजी

इ योजना आदिवासिक आ अन्य परंपरागत वनवासिक कें लेल वन अदिकार अधिनियम कें पहिले मौजूदा पदाधिकारी कें तुलना में अधिमान्यता दइ छै. आ सूचित करइ छै 2014 मे दाखिल 37.69 लाख दावक मे स 14.57 लाख लाभार्थियक कें व्यक्तिगत अधिकार कें सुरक्षा कैल गेलक्ष् 22200 समुदायक कें वन अधिकार कें अइ कानून कें अंतर्गत से हो लैल गेलक्ष्.

स्त्रोत : पोर्टल विषय सामग्री टीम एवं आकाश श्रीवास्तव,स्वंतत्न पत्रकार,पत्न सूचना

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